दाजीपुर वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित एक समृद्ध जैव विविधता वाला संरक्षित क्षेत्र है। पश्चिमी घाट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में से एक माना जाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पारिस्थितिक महत्व प्राप्त है।
प्रारंभ में लगभग 20 किलोमीटर का यह वन क्षेत्र छत्रपति शाहू महाराज का शिकार आरक्षित क्षेत्र था। 1958 में इसे भारतीय गौर (बाइसन) के संरक्षण के लिए वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया। बाद में 1985 में कळम्मावाडी बांध और राधानगरी बांध के आसपास के विशाल वन क्षेत्र को भी इसमें शामिल कर लिया गया। आज इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 350 वर्ग किलोमीटर है।
यहाँ के सदाबहार उष्णकटिबंधीय वन घने वृक्षों, औषधीय पौधों तथा 800 से अधिक वनस्पति प्रजातियों से समृद्ध हैं। समुद्र तल से लगभग 1,200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ का मौसम वर्षभर सुहावना रहता है। भारी वर्षा के कारण घने जंगल, स्वच्छ झरने और छोटी-छोटी जलधाराएँ यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
अभयारण्य में भारतीय गौर, चीतल, सांभर, भौंकने वाला हिरण, माउस डियर, नाग, वाइपर तथा अनेक प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। यह स्थान वन्यजीव प्रेमियों, पक्षी निरीक्षकों, प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए अत्यंत लोकप्रिय है।
अभयारण्य के निकट स्थित गगनगिरी महाराज मठ तथा राधानगरी बांध के बैकवॉटर का प्राकृतिक सौंदर्य भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।