स्वागतम्
कोल्हापुर में पर्यटन या किसी भी कारण से आने वाले सभी लोगों का हार्दिक स्वागत है।
कला नगरी के रूप में प्रसिद्ध यह शहर हर व्यक्ति को दिल को छू लेने वाला अनुभव देता है। विश्व स्तर पर प्रसिद्ध इस शहर की विशेषताओं का वास्तविक अनुभव यहाँ आकर ही महसूस किया जा सकता है।
यहाँ की खाद्य परंपरा बहुत समृद्ध है। शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के अनेक स्वादिष्ट व्यंजन यहाँ उपलब्ध हैं। यहाँ की मिसल एक बार खाने के बाद दोबारा खाने का मन अवश्य करता है। तांबड़ा और पांढरा रस्सा (लाल और सफेद करी – मांसाहारी)
यहाँ हर जगह मिलता है, लेकिन इसकी खास चटपटी और बेहतरीन स्वाद के कारण इसे ‘कोल्हापुरी’ कहा जाता है।
पर्यटक यहाँ के स्थानीय कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई गई कोल्हापुरी चप्पलें विशेष रूप से खरीदते हैं। यहाँ की मेहमाननवाज़ी ‘कोल्हापुरी गुड़’ की तरह मीठी और अविस्मरणीय है। ‘दूधकट्टा’ यहाँ की एक खास परंपरा है, जहाँ भैंस का ताज़ा दूध सीधे निकालकर दिया जाता है।
यह सुविधा सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक उपलब्ध रहती है। यह दूध पहलवानों और अन्य लोगों के लिए पौष्टिक आहार प्रदान करता है।
‘कुश्ती’ कोल्हापुर का पारंपरिक खेल है, जिसे राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज का संरक्षण प्राप्त था। कोल्हापुर ने महिलाओं के सौंदर्य को बढ़ाने वाला बहुमूल्य आभूषण ‘कोल्हापुरी साज़’ भी दिया है।
पश्चिमी घाट का एक महत्वपूर्ण भाग होने के कारण कोल्हापुर में समृद्ध जैव विविधता, विभिन्न प्रकार की वनस्पतियाँ और जीव-जंतु, तथा सुंदर पहाड़ी स्थल और पर्यटन स्थान देखने को मिलते हैं।