विशालगड किला
पुराना नाम: खेलना (खिलगिल)
स्थान: कोल्हापुर से लगभग 85 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम
आधार गाँव: गजापुर
ऊँचाई: समुद्र तल से लगभग 1,130 मीटर
संक्षिप्त इतिहास
विशालगढ़ सह्याद्रि पर्वतमाला का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किला है। माना जाता है कि इसका निर्माण 1058 ईस्वी में शिलाहार राजा नरसिंह ने कराया था। प्रारंभ में इसका नाम खेलना (खिलगिल) था।
समय-समय पर यह किला यादव, खिलजी, बहमनी, विजयनगर और आदिलशाही शासकों के अधीन रहा। बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1659 में इसे स्वराज्य में शामिल किया।
1660 में पन्हाला किले से निकलकर विशालगढ़ पहुँचने की ऐतिहासिक घटना तथा बाजी प्रभु देशपांडे द्वारा पावनखिंड में दिया गया अद्वितीय बलिदान भारतीय इतिहास की अमर गाथाओं में गिना जाता है।
छत्रपति संभाजी महाराज ने किले की मरम्मत करवाई। 1689 में छत्रपति राजाराम महाराज के जिंजी प्रस्थान के बाद विशालगढ़ मराठा शासन का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र बना रहा। रामचंद्रपंत अमात्य ने यहीं से राज्य संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1844 में विद्रोह के बाद ब्रिटिश सेना ने किले की अनेक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया।
विशालगढ़ आंबा घाट और आनस्कुरा घाट के बीच स्थित है तथा ऐतिहासिक काल में सह्याद्रि और कोंकण क्षेत्र की निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण सामरिक दुर्ग माना जाता था।
दर्शनीय स्थल
- अमृतेश्वर मंदिर
- श्री नृसिंह मंदिर
- तकमक टोक
- सती वृंदावन
- पंत प्रतिनिधि महल
- अहिल्याबाई की समाधि
- हजरत मलिक रेहान दरगाह
- बाजी प्रभु देशपांडे और फुलाजी प्रभु के स्मारक
ठहरने की व्यवस्था
विशालगढ़ के आसपास स्थानीय लोगों द्वारा साधारण किराये पर रहने की सुविधा उपलब्ध है।