पंचगंगा नदी
पंचगंगा नदी कोल्हापुर के लोगों की जीवनरेखा मानी जाती है। इसका उद्गम प्रयाग चिखली से होता है। पंचगंगा नदी कासारी, कुंभी, तुलसी और भोगावती इन चार नदियों के संगम से बनती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, सरस्वती नामक एक भूमिगत नदी भी इन चार नदियों से मिलती है, जिससे यह पंचगंगा कहलाती है।
प्रयाग संगम पंचगंगा नदी का वास्तविक प्रारंभिक बिंदु है। चारों नदियों का जल मिलने के बाद यह नदी एक बड़े प्रवाह के रूप में आगे बढ़ती है। कोल्हापुर के उत्तर में इसने एक विस्तृत जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain) का निर्माण किया है। इसके बाद नदी पूर्व दिशा की ओर बहती रहती है।
कोल्हापुर से लगभग 30 मील पूर्व की ओर बहने के बाद पंचगंगा नदी कुरुंदवाड के पास कुरुंदवाड येथे कृष्णा नदीमें मिल जाती है। इस मार्ग में इसे केवल एक प्रमुख सहायक नदी प्राप्त होती है, जिसे हातकणंगले या कबनूर नदी कहा जाता है। यह नदी आळते की पहाड़ियों से निकलकर हातकणंगले और कोरोची से होती हुई कबनूर के निकट पंचगंगा में मिलती है।
शिरोली से लेकर श्रीक्षेत्र नृसिंहवाडी के निकट कृष्णा नदी से मिलने तक इसका विस्तृत मैदान फैला हुआ है। इस क्षेत्र की विशेषता स्थानीय भाषा में "माल" कहलाने वाली घिसी हुई गोलाकार पहाड़ियाँ और गहरी धँसी हुई जलधाराएँ हैं।
माणगाव के पास से नदी लगभग 40 फीट गहरे तल में बहती है। आगे चलकर नदी के मार्ग में गहरे घुमाव (Incised Meanders) विकसित हुए हैं, जिनमें नरसोबावाड़ी क्षेत्र भी शामिल है।
पंचगंगा घाटी कोल्हापुर जिले के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में गिनी जाती है और यह विशेष रूप से चारे (घास) के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। नदी का तल उथला है तथा इसके ढलानदार किनारों पर सर्दियों में भरपूर फसलें उगाई जाती हैं।
कोल्हापुर में पंचगंगा नदी पर दो सुंदर पुल बने हुए हैं। इनमें से एक ब्रह्मपुरी टेकडी के निकट आंबा घाट मार्ग पर स्थित है और दूसरा पुणे मार्ग पर कुछ मील पूर्व में है।
गर्मी के मौसम में पंचगंगा और इसकी सहायक नदियों को पैदल पार किया जा सकता है, जबकि वर्षा ऋतु में लगभग 23 घाटों पर छोटी-बड़ी नावें चलती हैं।
पंचगंगा तथा इसकी सहायक नदियों का जल मुख्य रूप से गन्ने की खेती के लिए उपयोग किया जाता है। अक्टूबर में दक्षिण-पश्चिम मानसून समाप्त होने के बाद नदी पर अस्थायी मिट्टी के बांध बनाए जाते हैं और बैलों की सहायता से पानी उठाकर खेतों तक पहुँचाया जाता है।
पंचगंगा घाट
कोल्हापुर शहर के उत्तर-पश्चिम में पंचगंगा नदी के किनारे स्थित एक विशाल और सुंदर घाट है।
यहाँ अनेक मंदिर स्थित हैं, जिनमें से कुछ मंदिर नदी के भीतर भी बने हुए हैं। घाट पर नदी तक पहुँचने वाली लंबी पत्थर की सीढ़ियाँ हैं, जिनका उपयोग स्नान और कपड़े धोने के लिए किया जाता है।
घाट से अत्यंत मनोहारी दृश्य दिखाई देता है। नदी, पुल और घाट का विहंगम दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। घाट के उत्तर में स्थित ब्रह्मपुरी टेकडी प्राचीन नगर का ऐतिहासिक स्थल माना जाता है और यहाँ से पूरे क्षेत्र का सुंदर नजारा दिखाई देता है।