टाऊन हॉल
टाउन हॉल का निर्माण वर्ष 1876 में गॉथिक वास्तुकला शैली में किया गया था। यह सुंदर भवन एक विशाल और आकर्षक उद्यान के बीच स्थित है। यह उद्यान कोल्हापुर शहर के सबसे पुराने उद्यानों में से एक माना जाता है।
इस उद्यान में देशी तथा विदेशी पौधों की अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ के कई वृक्ष और पौधे औषधीय, सजावटी तथा शोध की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए यह उद्यान शोधकर्ताओं के लिए एक समृद्ध वनस्पति प्रयोगशाला के रूप में जाना जाता है।
यह स्थान अनेक पक्षियों, पशुओं, तितलियों और कीटों का निवास एवं विश्राम स्थल है। टाउन हॉल परिसर कोल्हापुर शहर में चमगादड़ों के सबसे बड़े निवास स्थलों में से एक माना जाता है।
भवन में दो शिखर (Spires) और ऊँची ढलानदार छत है। इसमें एक विशाल केंद्रीय सभागार (Hall) और गैलरी है। सभागार के दोनों ओर दो कमरे बने हुए हैं, जो सामने स्थित चौड़े बरामदे के माध्यम से मुख्य सभागार से जुड़े हुए हैं। भवन के सामने एक सुंदर पोर्च है, जिसके ऊपर एक विशाल छत (Terrace) बनाई गई है। एक बड़ा मेहराबदार लकड़ी का दरवाज़ा मुख्य सभागार में प्रवेश कराता है।
वर्ष 1949 से इस भवन का उपयोग गव्हर्मेट म्युझिअम के रूप में किया जा रहा है। संग्रहालय में काँच की अलमारियों में विभिन्न ऐतिहासिक वस्तुएँ प्रदर्शित की गई हैं।
भवन के उत्तरी भाग में एक कला दीर्घा (Art Gallery) है, जहाँ प्रसिद्ध स्थानीय कलाकारों की चित्रकृतियाँ प्रदर्शित हैं। ब्रह्मपुरी टेकडी की खुदाई में प्राप्त प्राचीन मूर्तियाँ, चंदन और हाथीदाँत पर की गई बारीक नक्काशी, प्राचीन सिक्के तथा क्षेत्र के प्रसिद्ध कलाकारों की चित्रकृतियाँ यहाँ प्रदर्शित की गई हैं।