Tryamboli Devi

त्र्यंबोली देवी

त्र्यंबोली देवी मंदिर का मंदिर कोल्हापुर शहर के पूर्व में स्थित एक ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है।


करवीर पुराणा के अनुसार, टेंबलाई, त्र्यंबोली अथवा त्र्यंबुली देवी, महालक्ष्मी की छोटी बहन थीं। कहा जाता है कि राक्षस कोलासुर पर विजय प्राप्त करने के बाद आयोजित उत्सव में देवताओं ने उनकी उपेक्षा की, जिससे वे नाराज़ हो गईं। इसी कारण उनका महालक्ष्मी देवी से विवाद हुआ और वे कोल्हापुर छोड़कर त्र्यंबुली पहाड़ी पर जाकर रहने लगीं।


जब उनकी अनुपस्थिति का पता चला, तब महालक्ष्मी देवी ने कुछ देवताओं को उन्हें वापस लाने के लिए भेजा, लेकिन उन्होंने लौटने से इंकार कर दिया। अंततः महालक्ष्मी देवी स्वयं एक कोहळा (कद्दू) लेकर उनके पास गईं। यह कद्दू कोलासुर के विरुद्ध हुए युद्ध की याद दिलाने के लिए ले जाया गया था, परंतु त्र्यंबोली देवी अपने निर्णय पर अडिग रहीं।


मान्यता है कि यह घटना आश्विन मास की पंचमी तिथि को हुई थी। आज भी इस अवसर पर महालक्ष्मी देवी अपनी बहन से मिलने जाती हैं, ऐसी धार्मिक मान्यता है। इस दिन महालक्ष्मी की प्रतिमा को एक कलश में स्थापित कर शोभायात्रा के साथ त्र्यंबोली पहाड़ी तक ले जाया जाता है।


 


इसके बाद एक अविवाहित कन्या द्वारा कोलासुर राक्षस के वध की स्मृति में कद्दू को टुकड़ों में काटा जाता है। इस अवसर पर विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मेले में मिठाइयाँ, खाद्य पदार्थ, खिलौने तथा अन्य वस्तुएँ बिक्री के लिए उपलब्ध रहती हैं।