Fort Rangana

रांगणा किला (प्रसिद्धगढ़)

पुराना नाम: प्रसिद्धगढ़
स्थान: कोल्हापुर शहर से लगभग 112 कि.मी. दक्षिण
समुद्र तल से ऊँचाई: 679 मीटर


संक्षिप्त इतिहास


रांगणा किला, जिसे प्रसिद्धगढ़ भी कहा जाता है, सह्याद्रि पर्वतमाला में कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग जिलों की सीमा पर स्थित एक अत्यंत मजबूत और दुर्गम किला है। इसका निर्माण शिलाहार वंश के राजा भोज द्वितीय ने करवाया था।


वर्ष 1440 में मोहम्मद गवान ने इस किले पर अधिकार किया। बाद में बहमनी साम्राज्य के विभाजन के पश्चात यह किला आदिलशाही के अधीन आ गया। सितंबर 1660 में छत्रपति शिवाजी महाराज के कोंकण क्षेत्र के सेनापति राहूजी पंडित ने इस किले को स्वराज्य में शामिल किया।


रांगणा किला अपनी अभेद्य संरचना के कारण लंबे समय तक अजेय बना रहा। इसकी सुरक्षा के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने 6,000 होन खर्च किए थे। औरंगज़ेब ने भुदरगड और सामानगड जैसे निकटवर्ती किलों पर कब्ज़ा कर लिया, लेकिन रांगणा किले को जीतने में सफल नहीं हो सका। बाद में सावंतवाड़ी के शासकों ने भी कई प्रयास किए, परंतु अंततः मराठों की आंतरिक विश्वासघात के कारण ही यह किला उनके हाथ लगा।


किले की विशेषताएँ


रांगणा किला घने जंगलों से घिरा हुआ है, इसलिए आज भी यह दूर से आसानी से दिखाई नहीं देता। भाटवाड़ी इस किले का निकटतम गाँव है, जहाँ से किले तक का मार्ग घने जंगल, पहाड़ों और जलधाराओं से होकर गुजरता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस क्षेत्र में वन्यजीवों का निवास है।


किले में तीन प्राचीन प्रवेश द्वार, मजबूत प्राचीर, विशाल बुर्ज, वर्षभर जल से भरे तालाब, प्राचीन महलों के अवशेष तथा सुंदर पत्थर की नक्काशी देखने को मिलती है। किले से एक ओर कोंकण क्षेत्र का मनोहारी दृश्य तथा दूसरी ओर कोल्हापुर जिले की पर्वतमालाएँ और घाटियाँ दिखाई देती हैं।


रांगणा किला लगभग 3 कि.मी. लंबा और 1 कि.मी. चौड़ा है तथा यहाँ अनेक जलाशय स्थित हैं। माना जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज रायगढ़ से कोंकण और कर्नाटक की यात्रा के दौरान इस किले में ठहरते थे।


दर्शनीय स्थल



  • रांगणाई देवी मंदिर

  • शिव मंदिर

  • तालाब

  • भुयारी मार्ग (भूमिगत मार्ग)

  • गणेश मंदिर

  • कोंकण दरवाजा


ठहरने की व्यवस्था


 


किले पर ठहरने या भोजन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।