Fort Gandharvgad

गंधर्वगढ़ किला

स्थान: कोल्हापुर जिले के दक्षिणी भाग में
आधार गाँव: वालुकुली
समुद्र तल से ऊँचाई: 916 मीटर


संक्षिप्त इतिहास


गंधर्वगढ़, सह्याद्रि पर्वतमाला का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक किला है। सभासद बखर के अनुसार यह छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा पुनर्स्थापित किए गए 111 किलों में से एक था।


जनवरी 1666 में पन्हाला अभियान के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज ने लगभग 5,000 सैनिकों के साथ इस किले पर अधिकार किया। जुलाई 1687 में काकती कर्याती के देसाई तथा हुक्केरी परगना के देसाई ने मराठों से यह किला जीतकर आदिलशाह को सौंप दिया। इसके बदले उन्हें बेलगांव के आजमनगर तथा चंदगड-आजरा क्षेत्र की देशमुखी देने का वचन दिया गया। इसके बाद कई वर्षों तक यह किला आदिलशाही के अधीन रहा।


बाद में सदाशिवराव भाऊ पेशवा ने कर्नाटक अभियान के दौरान कुछ समय इस किले में निवास किया। अंततः वर्ष 1844 में ब्रिटिश सेना ने इस किले को ध्वस्त कर दिया।


किले की जानकारी


गंधर्वगढ़ किला चंदगड तालुका में स्थित है और इसका निकटतम आधार गाँव वालुकुली है। गाँव से किले तक पहुँचने में लगभग एक घंटे की पैदल यात्रा करनी पड़ती है।


किले के प्रवेश मार्ग पर एक छोटा हनुमान मंदिर स्थित है। आगे ग्रामदेवता चालोबा मंदिर तथा वर्षभर पेयजल उपलब्ध रहने वाला एक प्राचीन कुआँ है। मंदिर के सामने स्थित मैदान में कभी हिरेकर सावंत के महल के अवशेष थे। किले के पूर्वी भाग में कुछ प्राचीन चबूतरे दिखाई देते हैं। दक्षिण दिशा की प्राचीर आज भी अच्छी स्थिति में है और उसमें तीन गुप्त द्वार (गुप्त मार्ग) बने हुए हैं।


दर्शनीय स्थल



  • चालोबा मंदिर

  • तीन गुप्त द्वार

  • प्राचीन मूर्तियाँ एवं शिल्प


ठहरने की व्यवस्था


 


किले पर ठहरने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। निकटतम आवास की व्यवस्था नेसरी और चंदगड में उपलब्ध है।