स्थान: कोल्हापुर शहर से लगभग 140 कि.मी. दक्षिण-पूर्व
समुद्र तल से ऊँचाई: 738 मीटर
संक्षिप्त इतिहास
पारगढ़ किले का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज ने मराठा साम्राज्य की सुरक्षा तथा पुर्तगालियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के उद्देश्य से कराया था। लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैला यह किला आज आंशिक रूप से खंडहर अवस्था में है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व आज भी बना हुआ है।
किले की कुछ प्राचीर, एक प्रवेश द्वार तथा छह जलाशय आज भी सुरक्षित हैं, जिनमें से चार अच्छी स्थिति में हैं। किले पर भवानी माता का मंदिर तथा दो प्राचीन तोपों के अवशेष भी देखने को मिलते हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज ने तानाजी मालुसरे के वीरगति प्राप्त करने के बाद उनके पुत्र रायबा मालुसरे को इस किले की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी थी। आज भी तानाजी मालुसरे के वंशज इस किले की परंपरा और संरक्षण से जुड़े हुए हैं।
दर्शनीय स्थल
- मारुति मंदिर
- भवानी मंदिर
- भालेकर बुर्ज
- फडनीस बुर्ज
- महादेव बुर्ज
- गुंजाल तालाब
- महादेव तालाब
- फाटक तालाब
- गणेश तालाब
- विठोजी मालवे की समाधि
ठहरने की व्यवस्था
किले पर होटल या आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यकता होने पर स्थानीय ग्रामीणों के घरों में रात्रि विश्राम किया जा सकता है, जबकि भोजन की व्यवस्था पर्यटकों को स्वयं करनी होगी।