स्थान: कोल्हापुर शहर से लगभग 55 कि.मी. पश्चिम
आधार गाँव: गगनबावड़ा
समुद्र तल से ऊँचाई: 978 मीटर
संक्षिप्त इतिहास
गगनगढ़ किले का निर्माण शिलाहार वंश के राजा भोज द्वितीय ने वर्ष 1190 में करवाया था। वर्ष 1209 में यादव वंश के सिंघण यादव ने राजा भोज को पराजित कर इस किले पर अधिकार कर लिया। बाद में बहमनी सल्तनत के विभाजन के पश्चात यह किला आदिलशाही के अधीन चला गया।
मराठा साम्राज्य के समय छत्रपति राजाराम महाराज ने इस किले की जागीर रामचंद्रपंत अमात्य को प्रदान की। बाद में वर्ष 1844 में ब्रिटिश सेना ने इस किले को काफी हद तक ध्वस्त कर दिया।
गगनगढ़, जिसे गगनबावड़ा किला भी कहा जाता है, कोल्हापुर से सिंधुदुर्ग और गोवा जाने वाले मार्ग पर स्थित एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यह स्थान महायोगी गगनगिरी महाराज के मठ के लिए भी प्रसिद्ध है।
दर्शनीय स्थल
- किले का मुख्य प्रवेश द्वार
- बालेकिला
- बालेकिले का प्राचीन कुआँ
- करूल घाट का मनोरम दृश्य
- महायोगी गगनगिरी महाराज मठ
- भुईबावड़ा घाट का विहंगम दृश्य
- पुराने प्रवेश द्वार के अवशेष
- प्राचीन गुफाएँ
- गाइबी गहिनीनाथ मंदिर / मस्जिद
ठहरने की व्यवस्था
गगनबावड़ा में होटल, भोजनालय और आवास की अच्छी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इसके अलावा गगनगिरी महाराज मठ में यात्रियों के लिए यात्री निवास (यात्री भवन) की व्यवस्था भी उपलब्ध है।