अलमप्रभू पहाड़ी
अलमप्रभू पहाड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है। यहाँ स्थित अलमप्रभू मंदिर लगभग 27 फुट लंबा, 17 फुट चौड़ा और 10 फुट ऊँचा है। यह मंदिर विशेष रूप से लिंगायत और जैन समुदाय के श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, अलमप्रभू एक महान लिंगायत संत थे। जब वे आलते गाँव आए, तब उनके शिष्य आदिलिंग भी उनके पीछे-पीछे आए। आगे गुरु का कोई पता न चलने पर उन्होंने यह मान लिया कि अलमप्रभू ने वहीं जीवित समाधि ली है। अपने गुरु के सम्मान में आदिलिंग ने वहाँ मंदिर का निर्माण कराया और एक अखंड दीप प्रज्वलित किया, जिसकी आज भी श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, मुगल सम्राट औरंगज़ेब (आलमगीर) ने इस मंदिर का दर्शन किया था और मंदिर को एक पादपीठ भेंट की थी। मूल पादपीठ अब उपलब्ध नहीं है, किंतु उसके स्थान पर नया पादपीठ स्थापित किया गया है।
मंदिर के सामने बने छोटे-छोटे गुंबद उन शिवभक्तों की स्मृति में बनाए गए माने जाते हैं जिन्होंने जीवंत समाधि ग्रहण की थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यहाँ अंतिम जीवंत समाधि लगभग 150 वर्ष पूर्व ली गई थी।