Fort Pavangad

पावनगढ़ किला











पुराना नाम: मार्कंडेयगढ़
स्थान: पन्हाला किले के निकट, कोल्हापुर जिला
समुद्र तल से ऊँचाई: 953 मीटर


संक्षिप्त इतिहास


पावनगढ़ किला कोल्हापुर जिले में पन्हाला किले से लगभग आधा मील पूर्व दिशा में स्थित है। दोनों किलों के बीच रेडेघाटी नामक घाटी स्थित है।


1673 ई. में छत्रपति शिवाजी महाराज ने पन्हाला किले को पुनः जीतने के बाद उसकी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पावनगढ़ किले का विकास कराया। बाद में औरंगज़ेब ने इस किले पर अधिकार कर इसका नाम 'रसूलगढ़' रखा। 1844 ई. में ब्रिटिश सेना ने इस किले को ध्वस्त कर दिया।


किले की सबसे बड़ी रक्षा इसकी 15 से 25 फुट ऊँची प्राकृतिक चट्टानी दीवारें थीं। कई स्थानों पर इन्हें कृत्रिम रूप से और अधिक खड़ा बनाकर मजबूत काले पत्थरों की प्राचीर बनाई गई थी।


इस किले की सबसे विशेष बात यहाँ स्थित घी का कुआँ है। मान्यता है कि युद्ध के समय घायल सैनिकों के उपचार के लिए इस कुएँ के घी का औषधि के रूप में उपयोग किया जाता था।


दर्शनीय स्थल



  • घी का कुआँ

  • मार्कंडेय ऋषि की गुफा

  • भगवान शिव मंदिर

  • यशवंत बुर्ज

  • चाँद-सूरज बुर्ज

  • श्री गणेश मंदिर

  • काला तालाब


ठहरने की व्यवस्था


पावनगढ़ किले पर ठहरने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। पर्यटक पन्हाला किले में होटल, लॉज और भोजन की सुविधाओं का लाभ ले सकते।